धातु का निष्कर्षण(Metallurgy in hindi)

धातु का निष्कर्षण (metallurgy definition in hindi)


प्रकृति में धातु दो अवस्थाओं में पाए जाते हैं –

1- मुक्त अवस्था – कम क्रियाशील धातुएं
जैसे-

सोना( Au ) , चाँदी ( Ag ) , प्लैटिनम (Pt )

etc.
2- संयुक्त अवस्था – अधिक क्रियाशील धातुएं

जैसे- तांबा (Cu ) , लोहा (Fe ) , जिंक (Zn )

etc.

खनिज(Minerals) –

धातुओं के यौगिक(Compound) पृथ्वी में मिटटी , रेत , आदि अशुद्धियों के रूप में होते हैं , इनको खनिज कहते हैं |

अयस्क(Ores) –

वह खनिज जिससे धातु का निष्कर्षण आसानी से , कम समय और कम लागत में हो , अयस्क कहलाता है |
जैसे-

कापर का अयस्क कॉपर पाईराइट (CuFeS2 ) , एल्युमीनियम का अयस्क बाक्साइट (Al2O3 . 2H2O )

etc.

धातुकर्म (Metallurgy)-

अयस्क से शुद्ध धातु प्राप्त करने की क्रिया धातुकर्म कहलाता है |
धातुकर्म की क्रिया निम्न चरणों में होती है –

1- अयस्क का सांद्रण (Concentration of Ore)-

मिटटी , कंकण-पत्थर आदि मिले हुए अयस्क , जिन्हें अधात्री या मैट्रिक्स कहते हैं , का सबसे पहले सांद्रण किया जाता है |

सांद्रण के लिए निम्नलिखित तीन विधियों का उपयोग किया जाता है –

a- फेन-प्लवन विधि(Froth Floatation Method) या झाग विधि

इस विधि के द्वारा सल्फाइड अयस्कों का सांद्रण होता है |
जैसे-

CuFeS2 , Cu2S , PbS etc.

b- चुम्बकीय पृथक्करण विधि (Magnetic Separation Method)-

जब अशुद्धियाँ अनुचुम्बकीय होती हैं , तब इस विधि का उपयोग किया जाता है |

c- गुरुत्वीय पृथक्करण विधि(Gravity Separation Method) –

इस विधि द्वारा हल्की अशुद्धियाँ जैसे – रेत , मिट्टी को अयस्क से दूर किया जाता है |

2- निस्तापन(Calcination) –

यह परवर्तनी भट्टी में होता है तथा इस विधि द्वारा ऑक्सिजन युक्त अयस्को (जैसे- कार्बोनेट ) का शोधन करते हैं |
इस विधि में अयस्क को उच्च ताप पर ( उसके गलनांक से निचे ) गर्म करते हैं जिससे उसमें उपस्थिति नमी , SO2 , CO2 और अन्य वाष्पशील कार्बोनिक अपद्रव बाहर निकल जाते हैं |
जैसे-

Al2O3 . 2 H2O → Al2O3 + 2 H2O

3- भर्जन(Roasting) –

यह भी परावर्तनी भट्टी में होता है , इस विधि में सल्फर(S) और आर्सेनिक(As ) अशुद्धियों को दूर किया जाता है |
इस विधि में अयस्क को वायु की उपस्थिति में उसके गलनांक से निचे उच्च ताप पर गर्म करते हैं |
जैसे-

4 As + 3 O2 → 2 As2O3

4- प्रगलन(Smelting) –

इस विधि में अयस्क में कोई गलाक ( जैसे- SiO2 या कोक ) मिलाकर उच्च ताप पर गर्म किया जाता है , जिससे अयस्क में उपस्थिति अशुद्धियाँ धातुमल (slag) के रूप में बाहर निकल जाती हैं |
जैसे-

FeO + SiO2 → FeSiO3

Note- जब अयस्क में क्षारीय अशुद्धियाँ हों, तब अम्लीय गालक (SiO2) तथा जब अयस्क में अम्लीय अशुद्धियाँ हों , तब क्षारीय गालक (CaO) का उपयोग करते हैं |

5- धातु का शोधन (Metal Refining)

प्रगलन के बाद भी अयस्क में कुछ अशुद्धियाँ रह जाती हैं , यह अशुद्धियाँ शोधन के द्वारा समाप्त होतीं हैं | शोधन के लिए विद्युत्-अपघटन की विधि उपयोग की जाती है |


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