कैसे खुश रहें – Motivational story in hindi

कैसे खुश रहें (How to be happy)- Motivational story in hindi for students <--meta tags-->

कैसे खुश रहें (How to be happy)- Motivational story in hindi


Hi friends , educational और motivational blog StudyTrac पर आपका स्वागत है , आज की पोस्ट में हम जानेंगे की ‘ कैसे खुश रहे ? ‘

हम चाहें जिंदगी में कुछ भी कर लें या कुछ भी प्राप्त कर लें , लेकिन अगर हम खुश ही नहीं रहेंगे तो जिंदगी जीने का क्या फायदा | आपने बहुत से लोगों को देखा होगा की उनके पास बहुत कुछ होता है , लेकिन उसके बावजूद वे खुश नहीं रहते और बिना किसी कारण के दुखी रहते हैं |

आमतौर पर इस तरह के दुखों का कारण असंतोष होता है , हमारे पास जो चीज़ उपलब्ध है , हम उसका आनंद उठाना छोड़कर , उन चीजों का सपना देखने लगते हैं , जो हमारे पास है ही नहीं और परिणामतः दुखी होते हैं | आइये इसी से सम्बंधित एक प्रेरणादायक कहानी पढ़ते हैं –

Motivational story in hindi

प्राचीन काल में एक राजा रहता था , उसका साम्राज्य दूर-दूर तक फैला हुआ था | उसकी प्रजा उसकी बहुत इज्ज़त करती थी | उस राजा के पास धन की भी कोई कमी नहीं थी | लेकिन उसके पास सबकुछ होते हुए भी वह बहुत दुखी था और उसे समझ नहीं आ रहा था की आखिर उसके दुखों का कारण क्या है |

धीरे-धीरे अपने इन्हीं दुखों के कारण वह बीमार पड़ गया | दूर- दूर से बैध आकर उसका इलाज करने लगे लेकिन उसकी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ , और प्रतिदिन उसकी हालत ख़राब होती जा रही | इस बात से उसकी पूरी प्रजा बहुत दुखी थी | राजबैध भी हर संभव इलाज कर चुके थे लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा था , और किसी को भी यह समझ नहीं आ रहा था की आखिर राजा को बीमारी कौन सी हुई है |

उन्हीं दिनों उस नगर में एक साधू महात्मा आये हुए थे , वह बहुत ज्ञानी महात्मा थे और जो भी उनके पास जाता वह उसके दुखों को दूर कर देते थे | उनकी सबसे खास बात यह थी की वह किसी के घर नहीं जाते थे जब राजा के लोगों को उस महात्मा के बारे मे पता चला तो वह महात्मा के पास गए और राजा का उपचार करने का आग्रह करने लगे ,वैसे तो वह महात्मा किसी के घर नहीं जाते थे लेकिन उन्होंने जब सुना की यहाँ के राजा बीमार हैं और उनकी स्थिति बहुत ख़राब है तो वह तुरंत चल पड़े |

महल में पहुचकर जब उस महात्मा ने राजा की जाँच किया तब उनको बीमारी का असली कारण पता चला | उन्होंने राजा से कहा , “राजन आपकी बीमारी तभी ठीक हो सकती है जब आप किसी ऐसे व्यक्ति का वस्त्र पहन लें जो पूर्ण रूप से खुश हो ” | फिर क्या था , सैनिकों को आदेश दिया गया की किसी ऐसे व्यक्ति को खोज कर लाओ जो पूर्ण रूप से प्रसन्न हो | सैनिक ऐसे व्यक्ति की खोज में निकल गए , और दिनभर ढूढ़ते रहे लेकिन उन्हें एक भी ऐसा नहीं मिला जिसके पास कोई दुःख नहीं हो , हर किसी के पास कोई-न-कोई दुःख था या सभी किसी-न-किसी तरह से दुखी थे |

सैनिकों के इस तरह खाली हाथ लौट आने से राजा बहुत दुखी हुए | उसके बाद दो दिन सैनिक दिनों-रात घूमते रहे , लेकिन सफल नहीं हो पाए | तब राजा ने फैसला किया की वह खुद ऐसे व्यक्ति की तलाश करेंगे , जो पूर्ण रूप से प्रसन्न हो | फिर अगले दिन वह अपने कुछ अंगरक्षकों के साथ व्यपारी के वेष में प्रसन्न व्यक्ति की तलाश में निकल गए उनके साथ वेष बदले हुए वह महात्मा भी थे | उन्होंने अपना वेष इसलिए बदला हुआ था , ताकि कोई उन्हें पहचान ना सके क्योंकि अगर कोई राजा को पहचान लेता तो उनके डर से उनसे झूठ भी बोल सकता था |

राजा और उनके साथियों दोपहर तक ढूढ़ते रहे लेकिन कोई ऐसे व्यक्ति नहीं मिला जो पूर्ण रूप से प्रसन्न हो और दोपहर की वजह से धुप भी तेज हो गयी थी , इसलिए एक वृक्ष देखकर उन्होंने सोचा की कुछ देर आराम कर लिया जाए | जब वह आराम कर रहे थे , तभी उनकी नजर एक किसान पर गयी , जो उतनी कड़ी धुप में भी खेत जोत रहा था और गाना गा रहा था | उसके कपडे एकदम गंदे और पसीने से भीगे हुए थे और शरीर से पसीना टपक रहा था | उसके इतने मेहनत करने के कारण राजा ने अपने सेवकों से उसे बुलाने को कहा | राजा के सेवक उसे अपने साथ लेकर आये | वह राजा और उनके साथियों को पहचान नहीं पाया |

राजा ने उससे इतने धुप में काम करने का करना पूछा तो उसने कहा , ” श्रीमान जी मैं एक गरीब किसान हूँ ,अगर मेहनत नहीं करूँगा तो खाऊंगा क्या ? ”

फिर राजा ने उससे पूछा की तुम गाना क्यों गा रहे थे , क्या तुम्हें कष्ट नहीं हो रहा था ? और खाना तो तुम्हें राजा के महल से भी मिल सकता है |

तब उसने कहा , ” श्रीमान मैं किसान हूँ और खेती करना मेरा धर्म है , गाना मैं इसलिए गा रहा था क्योंकि मुझे गाना पसंद है और रही बात कष्ट की तो वह आपकी सोच पर निर्भर करता है , अगर आप आराम से बैठे हुए हैं और सोच रहे हैं की मुझे कष्ट हो रहा है तो आपको कष्ट होने लगेगा और अगर आपको सच में कष्ट हो रहा है और आप सोच रहे हैं की मुझे कोई कष्ट नही है तो आपका कष्ट कम हो जाएगा और आपने कहा की मुझे खाना तो राजा के महल से भी मिल सकता है तो इसका जवाब यह होगा की मैं अपनी खेती से जितना कमाता हूँ , मुझे उसी में संतोष है और मैं किसी से कुछ मांगता नहीं हूँ ”

उसके बात को सुनकर राजा बहुत प्रसन्न हुआ और उसने उस किसान से कहा की क्या तुम अपना कुर्ता मुझे दे सकते हो , तो वह तुरंत देने के लिए तैयार हो गया |

फिर राजा ने उससे पूछा की क्या तुम्हारे पास दूसरा कुर्ता है ? अगर तुम इसे मुझे दे दोगे तो स्वय क्या पहनोगे ?

तो उसने उत्तर दिया , “मेरा पास दूसरा नहीं है , लेकिन आप उसकी चिंता ना करें जब मेरे पास धन हो जायेगा तो मैं दूसरा बनवा लूँगा ”

जब राजा उस किसान का कुर्ता लेने लगा तो , साधु महात्मा ने उसे रोक दिया और कहा , ” रहने दो राजन , तुम्हे जो चाहिए वह तुमको मिल चुका है , तुमको इसके कपडे की नहीं बल्कि इसके बातों की जरुरत है , जब मैंने तुम्हारा जाँच किया तो मैंने पाया की तुम्हारे अंदर कोई भी शारीरिक बीमारी थी ही नहीं बल्कि तुम्हें तो मानसिक बीमारी थी और वह बीमारी थी तुम्हारा असंतोष | राजन इस किसान को देखो इसके पास कुछ भी नहीं है फिर भी यह खुश है क्योंकि इसके पास संतोष है इसके पास जितना है यह उसी में सुखी है और तुम यहाँ के राजा हो , तुम्हारे पास सब कुछ है उसके बाद भी तुम सुखी नहीं हो क्योंकि तुम्हारे पास संतोष नहीं है इसलिए मेरी एक बात को याद रखो ”

“खुश वही होता है , जिसके पास संतोष होता हैं ” |

इसलिए अगर खुश रहना चाहते हो तो संतोष को अपने अंदर बुलाओ , ख़ुशी अपने आप तुम्हारे अंदर चली आएगी |

दोस्तों ठीक इसी तरह हमारे जीवन में भी होता जब तक हमारे अन्दर संतोष रहता है , तब तक हम खुश रहते हैं और जब असंतोष हमारे अन्दर आ जाता है तब ख़ुशी हमारे अंदर से चली जाती है | अगर हमारे जीवन में कष्ट है तो हम दुखी क्यों हो और जितना समय हम दुखी होने में निकाल देंगे उतने समय में तो हम उस दुःख को दूर करने का हल खोज सकते हैं |

दोस्तों इस पोस्ट के अंत में मैं यही कहना चाहूँगा कष्ट से दुखी होने के बजाय उसका हल निकालिए और इस बात को याद रखिये

” सारे दुखों का कारण असंतोष है ”

तो दोस्तों यह थी आज की पोस्ट अगर आपको पसंद आया हो , तो share जरुर करें |

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