आत्मनिर्भरता – प्रेरणादायक कहानी

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Short motivational story in hindi

short motivational story in hindi :- नमस्कार दोस्तों प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक ब्लॉग StudyTrac पर आपका स्वागत है, इस पोस्ट में हम दो प्रेरणादायक कहानियां पढ़ने जा रहे हैं । यह प्रेरणादायक कहानियां बहुत ही ज्ञानवर्धक हैं |  यह प्रेरणादायक कहानियां मुझे whatsapp से प्राप्त हुई हैं |

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सब दिन होत न एक समान – Short Motivational story in hindi

किसी नगर में एक सेठ रहा करता था| वह बड़ा ही उदार और परोपकारी था| उसके दरवाजे पर जो भी आता था, वह उसे खाली हाथ नहीं जाने देता था और दिल खोलकर उसकी मदद करता था|

एक दिन उसके यहां एक आदमी आया उसके हाथ में एक पर्चा था, जिसे वह बेचना चाहता था| उसके पर्चे पर लिखा था – ‘सदा न रहे!’

इस परचे को कौन खरीदता, लेकिन सेठ ने उसे तत्काल ले लिया और अपनी पगड़ी के एक छोर में बांध लिया| नगर के कुछ लोग सेठ से ईर्ष्या करते थे| उन्होंने एक दिन राजा के पास जाकर उसकी शिकायत की जिससे राजा ने सेठ को पकड़वाकर जेल में डलवा दिया| जेल में काफी दिन निकल गए| सेठ बहुत दुखी था| क्या करे, उसकी समझ में कुछ नहीं आता था|

एक दिन अकस्मात् सेठ का हाथ पगड़ी की गांठ पर पड़ गया| उसने गांठ को खोलकर पर्चा निकाला और पर्चा पढ़ा| पढ़ते ही उसकी आंखें खुल गईं| उसने मन-ही-मन कहा-‘अरे, तो दुख किस बात का! जब सुख के दिन सदा न रहे तो दुख के दिन भी सदा न रहेंगे|’

इस विचार के आते ही वह जोर से हंस पड़ा और बहुत देर तक हंसता रहा| जब चौकीदार ने उसकी हंसी सुनी तो उसे लगा, सेठ मारे दुख के पागल हो गया है| उसने राजा को खबर दी| राजा आया और उसने सेठ से पूछा – क्या बात है?

सेठ ने राजा को सारी बात बता दी| उसने कहा – राजन आदमी दुखी क्यों होता है? सुख-दुख के दिन तो सदा बदलते रहते हैं| सुख और दुख तो जीवन के दो पहलू हैं| यदि आज सुख है तो हो सकता है कि कल हमें दुख का मुंह भी देखना पड़े|

यह सुनकर राजा को अपनी गलती का  अहसास हो गया| उसने सेठ को जेल से निकलवाकर उसके घर भिजवा दिया| सेठ आनंद से रहने लगा, क्योंकि उसे ज्ञात हो गया था कि सुख के साथ-साथ दुख के दिन भी सदा नहीं रहते ।

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आत्मनिर्भरता – Short Motivational story in hindi

पुराने जमाने की बात है| अरब के लोगों में हातिमताई अपनी उदारता के लिए दूर-दूर तक मशहूर था| वह सबको खुले हाथों दान देता था| सब उसकी तारीफ करते थे|

एक दिन उसने बहुत बड़ी दावत दी| जो चाहे, वह उसमें शामिल हो सकता था| हातिमताई कुछ सरदारों को लेकर दूर के मेहमानों को बुलावा देने जा रहा था|

रास्ते में देखता क्या है कि एक लकड़हारे ने लकड़ियां काटकर एक गट्ठर तैयार किया है, उसकी गुजर-बसर लकड़ियां बेचकर ही होती थी| वह पसीना-पसीना हो रहा था, थककर चूर-चूर हो गया था|

हातिमताई ने उससे कहा – ओ भाई! जब हातिमताई दावत देता है, तो तुम क्यों इतनी मेहनत करते हो दावत में शरीक क्यों नहीं हो जाते?

लकड़हारे ने जवाब दिया – जो अपनी रोटी आप कमाते हैं उन्हें किसी हातिमताई की उदारता की आवश्यकता नहीं होती|

हातिमताई भौचक्का होकर उसे देखता रहा गया|

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