रानी पद्मावती

रानी पद्मिनी [ रानी पद्मावती ] की कहानी

रानी पद्मिनी [ रानी पद्मावती ] की कहानी

चित्तौड़ की धरती , वीरों की धरती के नाम जानी जाती है | यहाँ अनेक वीरों और वीरांगनाओ ने जन्म लिया है और इस भूमि का और भारतवर्ष का शान बढाया है | रानी पद्मिनी या रानी पद्मावती एक ऐसी ही वीरांगना हैं , जिन्होंने अपने देश की शान के लिए , अपने देश की इज्जत के लिए अपना बलिदान दे दिया था | इस लेख में हम महारानी पद्मिनी ( महारानी पद्मावती ) के इतिहास के बारे में जानेंगे |

महारानी पद्मावती के बारे में जानने से पहले मैं यह बताना चाहूँगा की रानी पद्मावती के नाम के बारे में विशेषज्ञों को अभी पूरा ज्ञान नहीं है की उनका नाम ‘पद्मावती’ था की ‘पद्मिनी’ | कुछ विद्वान मानते हैं की उनका नाम पद्मावती है , लेकिन कुछ विद्वानों का मत है की उनका नाम पद्मिनी है | मालिक मुहम्मद जायसी ( जिन्होंने ‘पद्मावत’ की रचना की है ) मानते हैं की उनका नाम महारानी पद्मावती ही है और उन्होंने अपनी रचना पद्मावत में भी महारानी का नाम पद्मावती ही लिखा है |

महारानी पद्मावती के बारे में इतिहासकारों के पास बहुत सारी जानकारी नहीं है और महारानी पद्मिनी के बारे में अधिकांश जानकारी पद्मावत से ही मिलती है | पद्मावत के अनुसार ‘पद्मिनी’ शब्द का अर्थ सुन्दर स्त्री होता है | और महारानी पद्मिनी अपने समय की अद्वितीय सुंदरी थी |

पद्मावत के अनुसार महारानी पद्मावती चित्तौड़ के महाराजा रतनसिंह की पत्नी तथा रावल समरसिंह की पुत्रवधू थी | महारानी पद्मावती राजा गंधर्वसेन की पुत्र थीं तथा उनकी माँ का नाम चम्पावती था | उनके पिता महाराजा गन्धर्वसेन सिंहल द्वीप( श्रीलंका) के राजा थे | कुछ कहानियों के अनुसार लोगों का यह मानना है की श्रीलंका के राजा गन्धर्व सेन की 16,000 रानियाँ थीं | उनमे सबसे सुन्दर महारानी चम्पावती थीं |

रानी पद्मिनी [ रानी पद्मावती ] का इतिहास 

महारानी पद्मावती चम्पावती की पुत्री थी | चूँकि उस समय सुन्दर स्त्रियों को पद्मिनी कहा जाता था और चम्पावती की पुत्र पद्मावती अत्यंत सुन्दर थी इसलिए उनका नाम पद्मिनी रखा गया | महारानी पद्मावती की सुन्दरता की चर्चा उस समय चारो तरफ होती थी और जब इसके बारे में चितौड़ के राजा रतनसिंह ने सुना तो वह पद्मावती को पाने के लिए बेचैन हो गए |

और पद्मिनी को पाने के लिए उन्होंने सन्यासी का रूप धारण करके श्रीलंका में कई महीने बिताया और उसके पद्मावती से शादी करने के बाद उनको अपने महल में ले आये |

रानी पद्मावती के रूप की चर्चा जब दिल्ली के शासक अलाउदीन खिलजी के कानो में पड़ी तो वह महारानी को पाने के लिए चितौड़ पर आक्रमण कर दिया और आठ वर्ष तक युद्ध करता रहा लेकिन चितौड़ पर कब्ज़ा नहीं कर पाया और वापस लौट गया |

उसके बाद उसने दोबारा आक्रमण किया और धोखा से महाराजा रतनसिंह को बंदी बना लिया तथा उनको छोड़ने के बदले में रानी पद्मावती को मांगने लगा | इधर रानी ने अपने कुछ बहादुर सिपाहियों को औरत के वेष में पालकी में बिठा कर अलाउद्दीन खिलजी के पास भेज दिया | जो बहादुरी से राजा रतनसिंह को छुड़ाकर ले आये |

अलाउद्दीन खिलजी और रानी पद्मावती

लेकिन कुछ समय बाद ही उनको पाने पडोसी राजा देवपाल (कुम्भलगढ़ ) के साथ युद्ध करना पड़ा जिसमे वह बुरी तरह घायल हो गए और स्वर्ग सिधार गए | रतनसिंह की मृत्यु का खिलजी ने फायदा उठाया और चित्तौड़ के किले पर फिर से आक्रमण कर दिया | अपने राजा की अनुपस्थिति में चित्तौड़ के सैनिक अपना पराक्रम नहीं दिखा पाए और खिलजी ने किले पर कब्ज़ा कर लिया |

जब रानी पद्मावती ने यह बात सुनी तो उन्होंने अपने महल 1600 स्त्रियों के आग में कुदकर अपने देश का सम्मान मिट्टी में मिलने से बचा लिया | जब खिजली वहां पंहुचा तो उसे केवल राख सिवा और कुछ नहीं मिला |

हालाँकि यह कहानी लोगो में प्रचलित है , लेकिन अधिकांश विद्वान इस कहानी नहीं मानते | कुछ विद्वान तो यह मानते हैं की उस समय रतनसिंह नाम का कोई राजा था ही नहीं और श्रीलंका में गंधर्वसेन नाम का कोई राजा आज तक हुआ ही नहीं है | लेकिन कुछ विद्वान महारानी पद्मावती के इतिहास को मानते हैं |

और अधिकांश विद्वान अब यह मानते हैं की अलाउद्दीन खिलजी ने रानी पद्मावती को पाने के लिए चित्तौडगढ़ पर आक्रमण नहीं किया था , बल्कि व्यापारिक उपयोग के लिए उसने चित्तौडगढ़ पर हमला किया था |

विकिपीडिया के अनुसार ,“अब ऐतिहासिक तथ्य सामने आ जाने से इतिहासकार मानने लगे हैं कि आक्रमण का प्रमुख कारण अलाउद्दीन की साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षा एवं चित्तौड़ की सैनिक एवं व्यापारिक उपयोगिता थी। गुजरात, मालवा, मध्य प्रदेश, संयुक्त प्रांत, सिंध आदि भागों के व्यापारिक मार्ग चित्तौड़ से होकर गुजरते थे। स्वाभाविक है कि अलाउद्दीन खिलजी जैसा महत्वाकांक्षी सुल्तान इसको अवश्य अधिकृत करना चाहता। “

और खिलजी के दरबारी विद्वान आमिर खुसरो ने तारीख-ए-अलाई में लिखा है की खिलजी चित्तौड़ पर आक्रमण करने के लिए 28 जनवरी 1303 ई० में दिल्ली से रवाना हुआ और 26 अगस्त 1303 ई० को चितौड़ का किला जीत लिया | इससे यह बात भी साबित होता है की पद्मावत में लिखी गयी बात गलत है की खिलजी ने चित्तौड़ पर विजय प्राप्त करने के लिए आठ वर्षों तक युद्ध किया |

आमिर खुसरो यह भी लिखते हैं , की खिलजी ने अपने पहले की प्रयास में चित्तौड़ पर विजय प्राप्त कर लिया था | अत: यह बात भी गलत साबित हो जाता है की अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौडगढ़ पर दो बार आक्रमण किया था |

रानी पद्मावती मूवी / पद्मावती फिल्म

इस समय रानी पद्मावती की कहानी social पर अधिक वायरल हो रही है , क्योंकि संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती प्रदर्शन रोक दिया गया है | इस फिल्म निर्माणकर्ता ने रानी पद्मावती की जीवनी पर एक फिल्म बनाया है , जिसका नाम ‘पद्मावती’ है | इस फिल्म में मुख्य भूमिका में दीपिका पादुकोण , रणवीर सिंह और शहीद कपूर हैं | फिल्म पद्मावती में रानी पद्मावती की भूमिका दीपिका पादुकोण , राजा रतनसिंह की भूमिका शहीद कपूर तथा अलाउद्दीन खिलजी की भूमिका रणवीर सिंह निभा रहे हैं |

यह फिल्म 1 दिसंबर 2018 को रिजील होने वाली थी , लेकिन पुरे देशभर में इस फिल्म को लेकर चल रहे विरोध को देखकर सरकार ने इस फिल्म को प्रदर्शित करने से मना कर दिया है | और यह फिल्म सिनेमाघरों में आएगी या नहीं कोई जानकारी नहीं है |

रानी पद्मावती मूवी विरोध का कारण

कुछ लोगों का मानना है की इस फिल्म की कहानी को बदल कर बनाया गया और रानी पद्मावती के बारे में गलत दिखाया गया | इस फिल्म के विरोध में मुख्य भूमिका राजपूत करणी सेना निभा रही है | वहीं कुछ लोग यह कह रहे हैं की इस फिल्म में रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी को संबंध बनाते हुए दिखाया जायेगा | लेकिन फिल्म निर्माता का कहना है की इस फिल्म में ऐसा कोई दृश्य नहीं है |

फिल्म के विरोध को लेकर पद्मावती फिल्म के सेट पर कई बार तोड़-फोड़ किया गया | जिससे फिल्म निर्माता को काफी नुकसान उठाना पड़ा है , इस फिल्म निर्माण की कुल लागत 160 करोड़ थी लेकिन विरोध और तोड़-फोड़ के कारण इस फिल्म की लागत 200 करोड़ हो गयी है | विरोधी लोगों ने सिनामघरों के मालिको को धमकी दिया है की अगर उन्होंने यह फिल्म प्रदर्शित किया तो सिनमाघरों में तोड़-फोड़ किया जायेगा |

और संजय लीला पर देशद्रोह का आरोप भी लगाया गया | भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं ने इस फिल्म का विरोध किया है | वहीँ कांग्रेस के नेता इस फिल्म के सपोर्ट में दिखाई दे रहे हैं | तथा सेंसर बोर्ड ने फिल्म को प्रमाणित करने से भी इंकार कर दिया है | कई राज्य की सरकारों ने अपने राज्य में फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा दिया है | राज्य सरकारों का कहना है की अगर जनता चाहेगी तभी फिल्म का प्रदर्शन होगा |

फ़िलहाल फिल्म रिलीज होने के कोई आस नही दिख रहे हैं | आप कमेंट करके बताएं की रानी पद्मावती की यह कहानी आपको कैसी लगी तथा क्या आप चाहते हैं की यह फिल्म रिलीज हो ?

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source – wikipedia

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